नारायण साईं की जमानत याचिका खारिज, गुजरात हाईकोर्ट ने कहा- बरी होने की प्रथम दृष्टया संभावना नहीं

नारायण साईं की जमानत याचिका खारिज, गुजरात हाईकोर्ट ने कहा- बरी होने की प्रथम दृष्टया संभावना नहीं

अहमदाबाद: गुजरात हाईकोर्ट ने नारायण साईं को बड़ा झटका देते हुए उनकी सजा निलंबन और जमानत की पांचवीं याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि मामले में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है जिससे प्रथम दृष्टया यह लगे कि दोषसिद्धि टिकाऊ नहीं है या आरोपी के बरी होने की संभावना है। यह आदेश जस्टिस इलेश जे. वोरा और जस्टिस आर.टी. वच्छानी की खंडपीठ ने 4 मई 2026 को पारित किया। यह याचिका सूरत की निचली अदालत द्वारा 2019 में सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ लंबित अपील के दौरान दायर की गई थी।

न्यायालय ने अपने आदेश में,अभियोजन के अनुसार, पीड़िता और उसका परिवार आशाराम बापू के अनुयायी थे और सूरत आश्रम में आते-जाते थे। आरोप है कि नारायण साईं ने पीड़िता को मध्य प्रदेश और बिहार ले जाकर उसके साथ यौन उत्पीड़न, बलात्कार और अप्राकृतिक संबंध बनाए। बाद में 2013 में पीड़िता ने सूरत में एफआईआर दर्ज कराई थी। ट्रायल कोर्ट ने 2019 में नारायण साईं को IPC की धारा 376(2)(C), 377 सहित कई धाराओं में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

 

बचाव पक्ष के तर्क

 

बचाव पक्ष ने कोर्ट में दलील दी कि: आरोपी 10 साल से अधिक जेल में रह चुका है। पीड़िता के बयान में कई विरोधाभास हैं

एफआईआर दर्ज करने में 9 साल की देरी हुई। महत्वपूर्ण गवाहों की जांच नहीं हुई और यह केस राजनीतिक साजिश का हिस्सा है

इन दलीलों के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला भी दिया गया।

हाईकोर्ट ने कहा: ट्रायल कोर्ट ने पीड़िता के बयान को विश्वसनीय माना है कि इस स्तर पर साक्ष्यों का पुनर्मूल्यांकन नहीं किया जा सकता

गंभीर अपराध में दोषसिद्धि के बाद निर्दोषता की धारणा लागू नहीं होती। आरोपी के बरी होने की कोई स्पष्ट संभावना नहीं दिखती

कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी ने खुद अपील की सुनवाई में देरी की है और बार-बार जमानत आवेदन देकर प्रक्रिया का दुरुपयोग किया है।

कोर्ट ने माना कि आरोपी 11 साल से जेल में है, लेकिन कहा कि: देरी के लिए खुद आरोपी जिम्मेदार है

वह अपील की सुनवाई टालता रहा है इसलिए लंबी कैद के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती

हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि मुख्य अपील की सुनवाई 12 जून 2026 को तय है और उम्मीद जताई कि आरोपी उस दि

न बहस के लिए तैयार रहेगा।